यौन अभिविन्यास और समलैंगिकता की बेहतर समझ के लिए आपके सवालों के जवाब

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दस्तावेज़: American Psychological Association(2008)। Answers to your questions: For a better understanding of sexual orientation and homosexuality। Washington, DC: Author। [Retrieved from http://www.apa.org/topics/sorientation.pdf%5D © 2012 American Psychological Association

यौन अभिविन्यास और समलैंगिकता की बेहतर समझ के लिए आपके सवालों के जवाब

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परिचय 

१९७५ से अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन ने मनोवैज्ञानिकों को निर्देश दिया है कि समलैंगिक (गे और लेस्बियन) और बायसेक्शुअल (उभयलैंगिक) प्रवृत्ति पर लगे मानसिक बीमारी के कलंक को  मिटाया जाए। मनोविज्ञान क्षेत्र लोगों और जनसमूहों की खुशहाली से सम्बन्ध रखता है। इसलिए उसका ताल्लुक उनको होनेवाले खतरों से भी है। गे-लेस्बियन-उभयलैंगिक हमेशा से पूर्वाग्रह और भेदभाव का अनुभव करते आये हैं। इनका मन पर नकारात्मक प्रभाव हैं। सवाल-जवाब की यह माला लैंगिक अभिविन्यास (सेक्शुअल ओरिएंटेशन) की बेहतर समझ प्रदान करने के लिए बनाई गई है। हम यह भी उजागर करना चाहते हैं कि
समलैंगिक और उभयलैंगिक लोगों के विरुद्ध होने वाला भेदभाव और पूर्वाग्रह उनपर क्या असर करता है।

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सेक्शुअल ओरिएंटेशन (यौन अभिविन्यास) क्या है?

पुरुषों, महिलाओं, या दोनों लिंगों की तरफ होने वाली रोमांटिक, जज़्बाती और/या यौन आकर्षण की स्थायी वृत्ति को यौन अभिविन्यास कहते हैं। सेक्शुअल ओरिएंटेशन का मतलब है वह आत्म-पहचान जो आकर्षण और इससे सम्बंधित व्यवहार पर निर्भर हो। इस प्रकार के आकर्षण को अनुभव करने वाले लोगों का आपस में जुड़कर समुदाय बनना यह भी लैंगिक अभिविन्यास का परिणाम है। कई दशकों के अनुसंधान ने दिखाया है कि मानवीय यौन अभिविन्यास एक “निरंतरता” (कन्टीन्युअम) है, यानि दो सिरों के बीच पाया जाने वाला विस्तार। ‘किनसे’ नामक मशहूर मनोवैज्ञानिक ने लिखा है कि ज़्यादातर लोग पुरुषों और औरतों, दोनों से आकर्षित होने कि क्षमता रखते हैं। कुछ लोग दोनों से समान तौर पर आकर्षित होते हैं, तो कुछ आदमियों की तरफ ज़्यादा और कुछ औरतों की तरफ ज्यादा आकर्षित होते हैं। पूरी तरह सिर्फ अपने जिंस से आकर्षित होते हैं (पूरी तरह समलैंगिक) या पूरी तरह से सिर्फ दुसरे जींस से आकर्षित होते हैं (पूरी तरह विषमलैंगिक) ऐसे लोग कम हैं। कुछ लोग, आदमियों से ज्यादा, और कुछ औरतों से ज्यादा आकर्षित होते हैं।

हालांकि, यौन अभिविन्यास की आम चर्चा तीन श्रेणियों में की जाती है:
१) विषमलैंगिक या हेटरोसेक्शुअल: दूसरे लिंग के लोगों के प्रति भावनात्मक, रोमांटिक, और / या यौन आकर्षण, जैसे स्त्री के प्रति पुरुष का; या पुरुष के प्रति स्त्री का)
२) समलैंगिक या होमोसेक्शुअल: अपने जैसे लिंग के लोगों के प्रति भावनात्मक, रोमांटिक, और / या यौन आकर्षण, यानि पुरुष के प्रति पुरुष का आकर्षण (जिसे “गे” कहते हैं), और स्त्री के प्रति स्त्री का, (जिसे “लेस्बियन” कहते हैं) , और
३) उभयलैंगिक या बायसेक्शुअल: पुरुषों और महिलाओं के प्रति भावनात्मक, रोमांटिक, और / या यौन आकर्षण: यानि उभयलैंगिक पुरुष का पुरुषों और स्त्रियों के प्रति; और उभयलैंगिक स्त्री का पुरुषों और स्त्रियों के प्रति यौन आकर्षण)

दुनिया भर में विभिन्न संस्कृतियों और देशों में व्यवहार और आकर्षण की यह रेंज पायी जाती है। ऊपर की तीन श्रेणियों का पहचान बताने के लिए उपयोग कई संस्कृतियों में होता है – सबसे ज्यादा इस्तेमाल किये जाने वाली पहचान हैं ‘लेस्बियन’ (महिलाओं की तरफ आकर्षित महिलाएँ), ‘गे’ (पुरुषों की तरफ आकर्षित पुरुष), और उभयलैंगिक (पुरुषों और महिलाओं, दोनों की तरफ आकर्षित स्त्री अथवा पुरुष)। हालांकि, कुछ लोग इनके व्यतिरिक्त अपनी अलग पहचान बताते हैं। कुछ ऐसे भी लोग होते हैं जो बिल्कुल भी इन नामों का उपयोग नहीं करते हैं।

यौन अभिविन्यास, सेक्स और जेंडर की अन्य श्रेणियों से भिन्न है। ये अन्य श्रेणियाँ हैं जैविक सेक्स (शारीरिक और आनुवंशिक रूप से पुरुष या महिला होने के लक्षण, जैसे शिश्न या योनि की उपस्थिति या अनुपस्थिति इत्यादि), जेंडर पहचान या जिन्स (पुरुष या महिला होने की मानसिक भावना), और सामाजिक लिंग-निर्देशित भूमिका (मतलब वो सांस्कृतिक समझ जो तय करते हैं कि मर्दाना व्यवहार कैसा होता है और औरताना व्यवहार कैसा होता है)। यौन अभिविन्यास इन तीनोंसे भिन्न है।

यौन अभिविन्यास की बात अक्सर केवल वैयक्तिक लक्षणों जैसे जैविक लिंग, लिंग-निर्देशित स्वपहचान, या उम्र की दृष्टि से होती है। ये नज़रिया अधूरा है क्योंकि इसके अनुसार यौन अभिविन्यास सिर्फ दूसरों के साथ होनेवाले संबंधों के संदर्भ में परिभाषित किया गया है। लेकिन सेक्शुअल ओरिएंटेशन में और भी बहुत कुछ शामिल है। अन्य लोगों की तरह समलैंगिक भी अपने प्रेमी के साथ अपने व्यवहार के माध्यम से अपना यौन अभिविन्यास व्यक्त करते हैं, जिसमें शामिल हैं बर्ताव जैसे हाथों में हाथ डालना, चुंबन, इत्यादि। यौन अभिविन्यास बारीकी से तालुक रखता है उन गहरे आत्मीय संबंधों से, जो गहराई से महसूस की जाने वाली ज़रूरतों, जैसे प्यार, लगाव और आत्मीयता, को पूरा करते हैं।

यौन व्यवहार के अलावा, इन बंधनों को सुदृढ़ करता है वह व्यवहार जो सेक्स से ताल्लुक नहीं रखता – जैसे दंपत्ति के बीच का अशरीरिक स्नेह, आपसी ध्येय और मूल्य, आपसी सहयोग, और उनके बीच चल रही प्रतिबद्धता। इसलिए, यौन अभिविन्यास महज़ किसी के अंदर की एक व्यक्तिगत विशेषता नहीं है। बल्कि, वह एक जन समूह को परिभाषित करता है जिसका अंदर ऐसे लोगों को संतोषजनक और रोमांटिक संबंध मिलना मुमकिन है – ऐसा संबंध जो हर मानव की व्यक्तिगत पहचान का एक अटूट अंग है।

लोग कैसे जानते हैं कि वे समलैंगिक या उभयलैंगिक हैं?

वर्तमान वैज्ञानिक और व्यावसायिक समझ के अनुसार, वयस्क यौन अभिविन्यास की बुनियाद बनने वाले मूल आकर्षण, साधारणतः बचपन के मध्य और किशोरावस्था की शुरुआत के बीच उभरने लगते हैं। ये रूमानी, भावनात्मक और यौन आकर्षण के रुझान, किसी भी पूर्व यौन अनुभव के बिना पैदा हो सकते हैं। लोग ब्रह्मचारी अवस्था में भी अपने यौन अभिविन्यास से वाकिफ़ हो सकते हैं चाहे वे समलैंगिक, उभयलैंगिक, या विषमलैंगिक हों।

समलैंगिक और उभयलैंगिक लोगों के यौन अभिविन्यास के विभिन्न अनुभव हैं। वास्तव में कुछ लोग दूसरों के साथ संबंधों को आगे बढ़ाने का प्रयास करने से लंबे समय पहले से ही जानते हैं कि वे समलैंगिक अथवा उभयलैंगिक हैं। इसके विपरीत, कुछ लोग उनके यौन उन्मुखीकरण पर एक स्पष्ट लेबल सौंपने के पूर्व ही सेक्स में भाग लेते हैं (समलैंगिक और / या विषमलैंगिक जोड़ीदार/जोड़ीदारों के साथ)। कई लोगों को पूर्वाग्रह और भेदभाव की वजह से यौन अभिविन्यास पहचान स्वीकार करना मुश्किल होता है। इसलिए “मैं समलैंगिक हूँ / मैं उभयलैंगिक हूँ” यह पहचान क़ुबूल करना किसी भी व्यक्ति के लिए एक धीमी और कठिन प्रक्रिया हो सकती है।

एक व्यक्ति के विशिष्ट यौन अभिविन्यास होने का क्या कारण है?

एक व्यक्ति में विषमलैंगिक, उभयलैंगिक या समलैंगिक अभिविन्यास विकसित होने के सटीक कारणों के बारे में वैज्ञानिकों के बीच कोई सहमति नहीं है। अनुसंधान के द्वारा यौन अभिविन्यास पर संभव आनुवंशिक, हार्मोनल, विकासकीय, सामाजिक, और सांस्कृतिक प्रभावों का अनुसंधान किया गया है। मगर ऐसा कोई भी निष्कर्ष नहीं उभरा है, जो वैज्ञानिकों को कहने की अनुमति दे कि ‘हाँ, यौन अभिविन्यास “इस” विशेष कारक या “इन” कारकों द्वारा निर्धारित होता है’। कई लोगों को लगता है कि प्रकृति और परवरिश, यह दोनों जटिल भूमिकाएँ निभाते है। ज़्यादातर लोग महसूस करते हैं कि उन्होंने अपने यौन अभिविन्यास को स्वयं नहीं चुना।

समलैंगिक और उभयलैंगिकों के जीवन में पूर्वाग्रह और भेदभाव क्या भूमिका निभाते हैं?

अमरीका में समलैंगिक और उभयलैंगिक लोगों को उनके यौन अभिविन्यास के कारण व्यापक पूर्वाग्रह, भेदभाव और हिंसा का सामना करना पड़ता है। २० वीं शताब्दी में उनके विरुद्ध तीव्र पूर्वाग्रह व्यापक था। १९७०, १९८०, और १९९० के दशकों के सार्वजनिक राय सर्वेक्षण बताते हैं कि आम लोग समलैंगिकों के खिलाफ कट्टर नकारात्मक व्यवहार करते थे। आजकल जनता इस भेदभाव का विरोध करती है। लेकिन आज भी गे और लेस्बियंस की ओर दुश्मनी का भाव अमरीकी समाज में नियमित रूप से पाया जाता है। उभयलैंगिकों के खिलाफ पूर्वाग्रह भी तुलनीय स्तर पर मौजूद हैं। वास्तव में, उभयलैंगिक व्यक्तियों को विषमलैंगिक लोगों से ही नहीं, कुछ समलैंगिक लोगों से भी भेदभाव का सामना करना पड़ता हैं।

यौन अभिविन्यास के खिलाफ का भेदभाव कई रूप लेता है। अमरीकी समाज में समलैंगिक लोगों के विरुद्ध उत्पीड़न और हिंसा की ऊँची मात्रा गे-विरोधी तीव्र पूर्वाग्रह का संकेत है। अनेक सर्वेक्षणों से संकेत मिलता है कि लगभग सारे समलैंगिक लोग शाब्दिक हिंसा (जैसे गाली-गलोच) का अनुभव करते हैं। इसके अलावा, रोजगार और आवास के मामलों में उनके खिलाफ बड़े पैमाने पर भेदभाव होता है।

एचआईवी / एड्स महामारी के दौरान इस पूर्वाग्रह और भेदभाव का नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। एचआईवी / एड्स महामारी के प्रारंभिक दिनों में, यह धारणा थी कि यह एक “समलैंगिक” रोग है। इस ग़लत धारणा की वजह से इस रोग से उठे बड़े सामाजिक उथल-पुथल के प्रश्न को सुलझाने में काफी देर हुई। उस वक़्त समलैंगिक और उभयलैंगिक लोगों पर एक और बड़ा कलंक लगाया गया, क्योंकि वे इस रोग से ज्यादा मात्रा में प्रभावित थे। एचआईवी / एड्स से समलैंगिक/उभयलैंगिक पुरुषों का तथाकथित संबंध, और कुछ लोगों की गलत धारणा कि ‘सभी समलैंगिक और उभयलैंगिक पुरुषों को इन्फेक्शन हुआ था’, यह भी इस कलंक के कारण थे।

पूर्वाग्रह और भेदभाव का मनोवैज्ञानिक प्रभाव क्या है?

पूर्वाग्रह और भेदभाव के सामाजिक और व्यक्तिगत प्रभाव हैं। सामाजिक स्तर पर समलैंगिक और उभयलैंगिक लोगों के खिलाफ पूर्वाग्रह और भेदभाव ऐसे लोगों की रोजमर्रा ज़िन्दगी में पायी जाने वाली पूर्वाग्रह-भरी छवि (“ये लोग ऐसे ही होते हैं, ऐसा ही करते हैं”) में परिलक्षित होते हैं। यह धारणाएँ आसानी से मिटती नहीं, भले ही वे सबूत द्वारा समर्थित नहीं हैं। ये पूर्वाग्रह अक्सर बहाना बन जाते हैं समलैंगिक और उभयलैंगिक लोगों के साथ असमान व्यवहार करने का। उदाहरणार्थ, नौकरी के अवसरों, मातृत्व या पितृत्व की संभावना, और रिश्तों को दी जानेवाली मान्यता पर पाबंदियाँ इन्हीं गलत मान्यताओं की वजह से हैं।

व्यक्तिगत स्तर पर, समलैंगिक और उभयलैंगिक लोग पूर्वाग्रह और भेदभाव के नकारात्मक परिणाम की इस वजह से अपने यौन अभिविन्यास से इनकार करने, या उसे छुपाने का प्रयास करते हैं । हालांकि कई गे और लेस्बियन लोग समलैंगिकता के खिलाफ सामाजिक कलंक के साथ निपटने में कामयाब होते हैं,परन्तु यह पूर्वाग्रह का पैटर्न इनके स्वास्थ्य और खुशहाली पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव कर सकता है। पूर्वाग्रह और भेदभाव के नकारात्मक प्रभाव (कलंक) अन्य बातों (जाति, नस्ल, धर्म, या विकलांगता) के कारण कम-ज्यादा हो सकते है।

गे लेस्बियन लोग अक्सर व्यापक पूर्वाग्रह, भेदभाव और हिंसा के लक्ष्य हैं। ये उनके मानसिक स्वास्थ्य के मामले में उल्लेखनीय चिंता का विषय है। समलैंगिक/उभयलैंगिक लोगों के लिए तनाव का प्रमुख स्रोत हैं लैंगिकता से जुड़े पक्षपात, यौन अभिविन्यास से जुड़ा भेदभाव, और गे-विरोधी हिंसा। तनाव से मुकाबला करने के लिए सामाजिक समर्थन महत्वपूर्ण है। परन्तु गे-विरोधी दृष्टिकोण और भेदभाव, समलैंगिक/उभयलैंगिक लोगों को ऐसा समर्थन ढूँढने में मुश्किल खड़ी कर सकता है।

क्या समलैंगिकता एक मानसिक विकार है?

नहीं। गे, लेस्बियन और उभयलैंगिक रुझान विकार नहीं हैं। यौन अभिविन्यासों और मनोविकृति के बीच अनुसंधान ने कोई अन्तर्निहित सहयोग नहीं पाया है। विषमलैंगिक और समलैंगिक व्यवहार, दोनों मानव कामुकता के सामान्य पहलु हैं। दोनों के बारे में अलग-अलग संस्कृतियों और ऐतिहासिक युगों में लिखा गया हैं।

ये जटिल पूर्वाग्रह सम- और उभय-लैंगिक लोगों को मानसिक रूप से असंतुलित दिखाते हैं। पर कई दशकों के अनुसंधान और चिकित्सक अनुभव से निष्कर्ष मिलता है कि सम- और उभय-लैंगिक प्रवृत्तियाँ मानव अनुभव में नॉर्मल हैं। अमरीका के सारे मुख्य चिकित्सा और मानसिक स्वास्थ्य संगठन यही कहते हैं। गे, लेस्बियन तथा उभयलैंगिक रिश्ते मानव संबंधों के नॉर्मल रूप हैं। इसलिए, इन मुख्यधारा के संगठनों ने लंबे समय पहले ही समलैंगिकता के मानसिक विकार के तहत किये गए वर्गीकरण को मिटा दिया।

यौन अभिविन्यास को समलैंगिक से विषमलैंगिक तक बदलने के उद्देश्य से चलाई जाने वाली चिकित्साओं के बारे में बताएँ?

सभी प्रमुख राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संगठनों ने आधिकारिक तौर पर इन यौन अभिविन्यास को बदलने के लिए किये जाने वाले उपचारों के बारे में चिंता व्यक्त की है। आज तक ऐसा कोई वैज्ञानिक दृष्टि से पर्याप्त अनुसंधान नहीं कहता कि यौन अभिविन्यास को बदलने के उद्देश्य से चलाई जाने वाली चिकित्सा (“चेंज थेरपी” – विरोहक या रूपांतरण चिकित्सा) सुरक्षित या प्रभावी हैं। संभवतः ये रूपांतरण चिकित्साएँ उन पूर्वाग्रहों की पुष्टि करते हैं जो लेस्बियन, गे और उभयलैंगिक लोगों के विरुद्ध नकारात्मक वातावरण निर्माण करते हैं, विशेषतः उनके लिए जो अधिक रूढ़िवादी मज़हबी माहौल में पले-बड़े होते हैं।

समलैंगिक आकर्षण अनुभव करने वाली व्यक्ति को चिकित्सक ऐसे मदद कर सकते हैं:
१) समलैंगिकता के खिलाफ सामाजिक पूर्वाग्रहों के साथ निपटने में सक्रिय रूप से उन्हें मदद करना
२) आंतरिक संघर्ष से उत्पन्न / जुड़े मुद्दों को सफलतापूर्वक सुलझाने में सहायता करना, और
३) सक्रिय रूप से एक खुश और संतुष्ट जीवन व्यतीत करने में सहायता देना।

पेशेवर मानसिक स्वास्थ्य संगठनों ने उनके सदस्यों को आदेश दिए हैं कि
१) एक व्यक्ति (क्लाइंट) के खुद के बारे में निर्णय लेने के अधिकार का सम्मान करें;
२) क्लाइंट के नस्ल, संस्कृति, कौमियत, उम्र, लिंग, लिंग पहचान, यौन अभिविन्यास, धर्म, सामाजिक स्थिति, भाषा, और शारीरिक या मानसिक विकलांगता के होने / न होने के प्रति संवेदनशील रहें।
३) इन कारकों पर आधारित पूर्वाग्रहों को खत्म करने में मदद करें।

प्रकटीकरण” क्या है और यह महत्वपूर्ण क्यों है?

समलैंगिक और उभयलैंगिक व्यक्तियों के अनुभवों के कई पहलुओं से प्रकटीकरण जुड़ा है: समलैंगिक आकर्षण होने की अपने आप की जागरूकता, इस आकर्षण के बारे में एक या अनेक लोगों को बताना, इस आकर्षण के बारे में व्यापक रूप से प्रकट करना, और गे-लेस्बियन-उभयलिंगी समुदाय का सदस्य होने की पहचान होना। अंग्रेजी में इसे ‘कमिंग आउट’ कहते हैं, और इस वाक्यांश का शाब्दिक अर्थ है “बाहर आना”। कई लोग पूर्वाग्रह और भेदभाव के जोख़िम की वजह से अपने बारे में बताने में संकोच करते हैं। कुछ लोग अपनी पहचान गुप्त रखना पसंद करते हैं, कुछ सीमित परिस्थितियों में प्रकटीकरण का रास्ता चुनते हैं; कुछ बिलकुल खुले-आम प्रगटीकरण करने का फैसला करते हैं।

समलैंगिक और उभयलैंगिक लोगों के लिए प्रकटीकरण अक्सर एक महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक कदम है। अनुसंधान दर्शाता है कि अपने यौन अभिविन्यास के बारे में सकारात्मक भावना रखने और उसे अपने जीवन में सम्मिलित करने से खुशहाली और मानसिक स्वास्थ्य बढ़ते हैं। इस ‘एकीकरण’ की प्रक्रिया में अक्सर समाविष्ट हैं अपनी पहचान का दूसरों के सामने खुलासा करना और समलैंगिक समुदाय की गतिविधियों में भाग लेना। दूसरों के साथ अपने यौन अभिविन्यास के बारे में बातचीत करने से इन लोगों को अधिक सामाजिक समर्थन मिलता है, जो मानसिक स्वास्थ्य और मनोवैज्ञानिक खुशहाली के लिए महत्वपूर्ण है। विषमलैंगिकों की तरह लेस्बियन-गे-उभयालैंगिक लोग भी अपने परिवार, दोस्तों और परिचितों के साथ अपना जीवन बाँटने और उनका समर्थन प्राप्त करने के इच्छुक हैं। अतः इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि अधिक ‘खुले’ समलैंगिकों की तुलना में जिन समलैंगिकों को अपने यौन अभिविन्यास को छुपाना पड़ता है, उन्हें मानसिक और संभवतः शारीरिक स्वास्थ्य संबंधी ज़्यादा चिंताओं का लगातार सामना करना पड़ता है।

किशोरावस्था के दौरान  यौन अभिविन्यास और प्रकटीकरणके बारे में कुछ बताएँ?

किशोरावस्था एक अवधि है जब एक व्यक्ति की, उसके माता-पिता और परिवार से भिन्न स्व-पहचान और स्वायत्तता विकसित होती है। किशोरावस्था जीवन का ऐसा वक़्त बन सकता है जब प्रयोगों का अनुभव किया जाता हैं। कई युवाओं के सामने उनकी यौन भावनाओं से संबंधित सवाल खड़े हो सकते हैं। यौन भावनाओं से अवगत होना किशोरावस्था के दरम्यान व्यक्तिगत विकास का सामान्य पड़ाव है। कभी-कभी किशोरों को समलैंगिक भावनाएँ महसूस होती हैं, या समलैंगिक अनुभव आते हैं। उन्हें उनके यौन अभिविन्यास के बारे में अनिश्चितता हो सकती है। यह अनिश्चितता समय के साथ कम होती है। अलग व्यक्तियों के लिए इसका समाधान अलग होता है।

कुछ युवाओं को समलैंगिक आकर्षण होता है, कुछ समलैंगिक वर्तन में हिस्सा लेते हैं। लेकिन वे लेस्बियन-गे–उभयलैंगिक के रूप में पहचान को नहीं अपनाते, क्योंकि विषमलैंगिक नहीं होने के साथ कलंक जुड़ा हुआ होता है। कुछ किशोरों को समलैंगिक आकर्षण की भावनाओं का सतत अनुभव होता है, लेकिन वे सेक्स नहीं करते – या फिर अलग-अलग अवधियों के लिए विषमलैंगिक सेक्स करते हैं। कुछ लोगों को कई वर्षों तक समलैंगिक आकर्षण महसूस किया होता है। लेकिन समलैंगिक आकर्षण के साथ जुड़े कलंक की वजह से, वे समलैंगिक यौन संबंधों में सक्रिय नहीं होते हैं, या दूसरों के सामने अपने आकर्षण का खुलासा नहीं करते।

कुछ युवकों के लिए, समलैंगिक आकर्षण के अन्वेषण की इस प्रक्रिया का नतीजा उनकी गे-लेस्बियन-उभयलैंगिक स्व-पहचान बनना होता है। कुछ के लिए, इस पहचान को स्वीकार करने से भ्रमित-मनःस्थिति का अंत होता है। जब उन्हें घरवालों का समर्थन मिलता हैं, वे संतोषजनक, स्वस्थ जीवन के लिए सक्षम होते हैं और किशोर विकास की सामान्य प्रक्रिया से गुज़र पाते हैं। कम उम्र में गैर-विषमलैंगिक पहचान को अपनाने पर लैंगिकता-विषयक संसाधन मिलना कठिन है। इसलिए जो कम उम्र में घरवालों को लैंगिकता का खुलासा करते हैं, उन्हें समर्थन की ज्यादा ज़रुरत होती है।

जो युवा समलैंगिक या उभयलैंगिक के रूप में स्व-पहचान दर्शाते हैं, संभवतः वे अधिक समस्याओं का सामना करते हैं, जैसे स्कूल में इतर विद्यार्थियों द्वारा तंग किया जाना या इस तरह के दुसरे नकारात्मक अनुभव। इन समस्याओं के निम्न नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं: आत्महत्या के विचार, जोखिम-भरे व्यवहार जैसे असुरक्षित यौन संबंध, शराब और नशीली दवाओं का प्रयोग। लेकिन ऐसे भी कई गे-लेस्बियन-उभयलैंगिक युवा हैं जो स्वास्थ्य से जुड़े जोखिम नहीं लेते। समस्याएँ वहा होती हैं जहाँ पूर्वाग्रह और भेदभाव अधिक हैं। किशोरों को अपनों से समर्थन मिलने से पूर्वाग्रह और भेदभाव का सामना किया जा सकता है।

परिवार, स्कूल में, और व्यापक समाज में समर्थन से जोखिम कम हो जाता है और स्वस्थ विकास को प्रोत्साहन मिलता है। युवकों को ज़रुरत है देखभाल और सहायता की, अपने आप से और दूसरों से ऊँची अपेक्षाएँ रखने की, और मिल-जुलके जीवन में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहन की। जो समलैंगिक-उभयलैंगिक तनाव के बावजूद यश हासिल करते हैं, वो सामाजिक दृष्टि से सक्षम, समस्याओं को सुलझाने में कुशल, स्वायत्तता और उद्देश्य की भावना से उजागर, और भविष्य के लिए तत्पर होते हैं।

कुछ युवाओं को समलैंगिक / उभयलैंगिक समझा जाता है क्योंकि वे पारंपरिक लिंग भूमिकाओं का पालन नहीं करते है। पारंपरिक लिंग भूमिका मर्दाना और औरताना बर्ताव परिभाषित करने वाली सांस्कृतिक मान्यता है। चाहे वे किसी भी पहचान को स्वीकारें – समलैंगिक, उभयलैंगिक या विषमलैंगिक – वे पूर्वाग्रह और भेदभाव का शिकार होते हैं, क्योंकि लोग पहले से धारणा बना लेते हैं की वे समलैंगिक या उभयलैंगिक हैं। इन युवाओं को अच्छा समर्थन तब मिलेगा जब स्कूल और समाज भेदभावपूर्ण भाषा और व्यवहार को बर्दाश्त नहीं करेंगे।

समलैंगिक / उभयलैंगिकों युवाओं को किस उम्र में अपनी लैंगिकता का खुलासा करना चाहिए?

इस सवाल का कोई सरल या निरपेक्ष जवाब नहीं है। विभिन्न परिस्थितियों में प्रकटीकरण से होने वाले जोखिम और फायदे भी अलग-अलग हैं। कुछ युवा ऐसे परिवारों में रहते हैं जहाँ उनके यौन अभिविन्यास के विषय में उन्हें स्पष्ट और स्थिर समर्थन मिलता है। एक कम उम्र में भी, खुलासा करने वाले इन युवाओं को कम जोख़िम का सामना करना पड़ता है। वो युवा जिनके परिवार समर्थन नहीं करते, प्रकटीकरण में अधिक जोखिम का सामना करते हैं। खुलासा करने वाले सभी समलैंगिक या उभयालैंगिक युवा उनके स्कूलों, सामाजिक समूहों, काम के स्थानों, और मज़हबी समुदायों में पूर्वाग्रह, भेदभाव, और संभवतः हिंसा का अनुभव करते हैं। सहानुभूतिक परिवार, दोस्तों, और स्कूलों की बदौलत इन अनुभवों के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं।

समलैंगिक संबंधों का स्वभाव कैसा है?

अनुसंधान से पता चलता है कि कई समलैंगिक प्रतिबद्ध रिश्ते चाहते हैं। उदाहरणार्थ, अमरीकी
सर्वेक्षण के आंकड़ों से संकेत मिलता है कि ४०% से ६०% गे पुरुष, और ४५% से ८०% लेस्बियन महिलाएं वर्तमान में एक समलैंगिक रोमांटिक रिश्ते में शरीक हैं। इसके अलावा, सन २००० की अमेरिकी जनगणना के डेटा के अनुसार, हर लैंगिकता के कुल मिलाकर पचपन लाख जोड़े हैं, जो साथ रह रहे थे लेकिन शादी नहीं की। इनमें लगभग ९ में १ की मात्र से, (५,९४,३९१ व्यक्ति) समलैंगिक भागीदारीयों में शरीक थे। हालांकि जनगणना के आंकड़े लगभग निश्चित रूप से एक साथ रहने वाले समलैंगिक दाम्पत्यों की वास्तविक संख्या का न्यूनानुमान कर रहे हैं, संकेत मिलता है कि संयुक्त राज्य अमेरिका में ३,०१,०२६पुरुष समलैंगिक दाम्पत्य-परिवारों और २,९३,३६५ महिला समलैंगिक दाम्पत्य-परिवारों की संख्या है।

गे लेस्बियन और उभयालैंगिक लोगों के बारे में पूर्वाग्रह-दूषित धारणाएं कायम है, हालांकि अध्ययनों ने इन धारणाओं को गुमराह करने वाली पाया है। उदाहरण के लिए, एक धारणा है कि गे तथा लेस्बियन संबंध दुष्क्रियाशील और दुखी हैं। हालांकि, अध्ययन से पता चलता है कि समलैंगिक और विषमलैंगिक जोड़े संबंध-संतुष्टि और प्रतिबद्धता के मापदंडों पर एक दूसरे के बराबर हैं।

एक दूसरी धारणा है कि ऐसे सम्बन्ध अस्थिर हैं। हालांकि, अनुसंधान से पता चलता है कि सामाजिक दुश्मनी के बावजूद, समलैंगिक टिकाऊ संबंध बनाते हैं। उदाहरण के लिए, सर्वेक्षण के आंकड़ों से संकेत मिलता है कि समलैंगिक पुरुष जोड़ों के १८% और २८% के बीच, और लेस्बियन जोड़ों में ८% और २१% के बीच एक साथ १० या अधिक वर्षों के लिए रहते हैं। यह भी सुझाव है कि समलैंगिक जोड़ों की स्थिरता बढ़ायी जा सकती अगर ऐसे जोड़ों के भागीदारों को उनके संबंधों के लिए समर्थन और मान्यता का वो ही स्तर मिले जो विषमलैंगिक जोड़ों को मिलता है – यानी, शादी के साथ जुड़े कानूनी अधिकार और जिम्मेदारिया।

एक तीसरी आम ग़लतफहमी है कि समलैंगिक जोड़ों के लक्ष्य और मूल्य, विषमलैंगिक जोड़े से अलग हैं। वास्तव में, शोध में पाया गया है कि वो कारक जो संबंध-संतुष्टि, प्रतिबद्धता, और स्थिरता को प्रभावित करते हैं, वे एक साथ रहने वाले समलैंगिक, और विषमलैंगिक विवाहित जोड़ों के लिए समान हैं।

उभयलिंगी संबंध अनुभवों पर अब तक बहुत कम अनुसंधान उपलब्ध है। अगर ये व्यक्ति समलैंगिक-संबंध में हैं, वे वही पूर्वाग्रह और भेदभाव का सामना कर सकते हैं जो समलैंगिक जोड़ों के सदस्यों को करना पड़ता है। अगर वे एक विषमलैंगिक रिश्ते में हैं, उनके अनुभव विषमलैंगिको के जैसे ही होते है, सिवाय तब, जब वे उभयलिंगी रूप में खुद को बतलाते हैं। तब संभावना है की वो भी वही पूर्वाग्रह और भेदभाव का सामना करेंगे जो समलैंगिक करते हैं।

क्या समलैंगिक अच्छे माता पिता बन सकते हैं?

कई लेस्बियन और गे स्वयं माता अथवा पिता हैं; अन्य माता अथवा पिता बनना चाहते हैं। सन २००० की
अमरीकी जनगणना के अनुसार: जो लेस्बियन जोडियाँ चला रहीं थी उन परिवारों में ३३% परिवार,
और जो गे जोडियाँ चला रहीं थी उन परिवारों में २२% परिवार ऐसे हैं जिनमें १८ वर्ष से कम आयु से कम एक या अनेक बच्चे हैं। हालांकि तुलनीय डेटा उपलब्ध नहीं हैं, कई एकल लेस्बियन तथा गे भी माता-पिता हैं, और कई समलैंगिक जोड़े अंशकालिक (कुछ समय तक) उन बच्चों के माता – पिता हैं जिनका प्राथमिक निवास कहीं और है।

आजकल समलैंगिक माता-पिता कई देशों में समाज में दिखाई देते हैं, और उनकी क़ानूनी स्थिति भी बेहतर हुई है। कुछ लोगों ने इन परिवारों में बच्चों की भलाई के बारे में चिंताएं व्यक्त कीं हैं। ये सवाल ज़्यादातर समलैंगिकों के बारे में नकारात्मक छवि पर आधारित हैं। इस विषय पर किया गया बहुतांश अनुसंधान ये सवाल उठाता है: क्या समलैंगिक (माता-माता अथवा पिता-पिता) द्वारा पले-बड़े बच्चों को, विषमलैंगिक माता-पिता द्वारा पले-बड़े बच्चों की तुलना में हानि होती है?

सबसे आम सवाल और उनके जवाब ये हैं:

1) क्या समलैंगिक माता-पिता के बच्चों को यौन पहचान के बारे में, विषमलैंगिक माता-पिता के बच्चों की तुलना में अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है? उदाहरण के लिए, क्या इन बच्चों को लिंग पर आधारित स्व-पहचान और/या लिंग भूमिका व्यवहार से जुडी समस्याओं से ज्यादा गुजरना पड़ता है?

अनुसंधान से इस सवाल का जवाब स्पष्ट है: लेस्बियन माओं के बच्चों में, यौन- और लिंग-पहचान (लिंग पर मपनी पहचान, लिंग से जुडी भूमिका का व्यवहार, और यौन-अभिविन्यास) उसी तरह विकसित होते हैं, जिस तरह विषमलैंगिक माता-पिता के बच्चों में होते हैं। समलैंगिक पिता के बच्चों के बारे में अध्ययन उपलब्ध नहीं हैं।

2) समलैंगिक माता अथवा पिता द्वारा पले-बड़े बच्चों में, क्या यौन पहचान के अलावा अन्य क्षेत्रों में व्यक्तिगत विकास में समस्या है? उदाहरण के लिए, समलैंगिक माता-पिता के बच्चे, मेंटल ब्रेकडाउन के शिकार होने की क्या ज्यादा संभावना है? क्या उनके बर्ताव में समस्याएं, या वे अन्य बच्चों की तुलना में मनोवैज्ञानिक दृष्टी से क्या कम स्वस्थ हैं?

एक बार फिर, व्यक्तित्व, आत्म-अवधारणा और व्यवहार की समस्याओं के अध्ययन से मालूम होता है कि समलैंगिक माता के बच्चों,  और विषमलैंगिक माता-पिता के बच्चों में बहुत कम फर्क है। समलैंगिक पिता के बच्चों के बारे में अध्ययन उपलब्ध नहीं हैं।

3) समलैंगिक माता अथवा पिता के बच्चों को क्या सामाजिक रिश्तों को निभाना मुश्किल हो सकता है? उदाहरण के लिए, क्या वे अपने साथियों द्वारा अधिक छेड़े जायेंगे? अन्यथा उनके साथियों द्वारा उनके साथ दुर्व्यवहार किया जायेगा?

एक बार फिर, सबूत यह संकेत करता है कि समलैंगिक माता अथवा पिता के बच्चों के अपने साथियों और वयस्कों के साथ सामान्य सामाजिक रिश्ते हैं। इस शोध से ये चित्र उभर आता है कि समलैंगिक माता अथवा पिता के बच्चों को सामाजिक जीवन का वही आनंद मिलता है जो उनकी उम्र से अपेक्षित है: जैसे साथियों, माता-पिता, परिवार के सदस्यों और दोस्तों के साथ रिश्ते बनाना।

4) क्या इन बच्चों का अधिक यौन शोषण होने की संभावना है – माता-पिता, माता/पिता के मित्रों या परिचितों द्वारा?

समलैंगिक माता अथवा पिता या उनके समलैंगिक, उभयलैंगिक मित्रों या परिचितों द्वारा यौन शोषण के भय का कोई वैज्ञानिक समर्थन नहीं है।

सारांश में, सामाजिक विज्ञान से पता चला है कि समलैंगिक माता अथवा पिता के बारे में उठायी जानेवाली चिंता, आम तौर पर उनके खिलाफ पूर्वाग्रह और दूषित छवि से आती हैं, और निराधार हैं। कुल मिलाकर, अनुसंधान इंगित करता है कि समलैंगिक माता पिता के बच्चों का समायोजन, विकास या खुशहाली, विषमलैंगिक माता-पिता के बच्चों से स्पष्ट रूप से अलग नहीं हैं।

सम- और उभयलैंगिक लोगों के खिलाफ पूर्वाग्रह और भेदभाव कम कैसे किया जा सकता है?

लेस्बियन-गे-उभयलैंगिक लोग: अपने यौन अभिविन्यास के बारे में खुला होकर पूर्वाग्रह और भेदभाव कम करने में मदद कर सकते हैं। यक़ीनन वे प्रकटीकरण करते वक़्त सावधानी बरतें की वे सुरक्षित हैं। वे अपने स्वयं के विश्वास प्रणाली की जांच कर सकते हैं, की क्या उन्होंने खुद गे-विरोधी मानसिकता क़ुबूल की है? वे समलैंगिक समुदाय और समर्थक विषमलैंगिक लोगों का समर्थन का उपयोग कर सकते हैं।

विषमलैंगिक: अगर आप पूर्वाग्रह और भेदभाव को कम करना चाहते हैं, गे-विरोधी छवि और पूर्वाग्रह भरी प्रतिक्रियाओं की जांच कर सकते हैं। समलैंगिकों को जाने और उनके साथ भेदभाव का मुकाबला करें। अन्य विषमलैंगिक लोगों को भेदभावपूर्ण प्रकृति पर विचार करने पर मजबूर करें। भेदभाव-विरोधी नीतियों, जिनमें समलैंगिकों के विरुद्ध होने वाला भेदभाव का भी मुकाबला हो – ऐसी नीतियों का समर्थन करें। किसी समलैंगिक के प्रकटीकरण की प्रक्रिया को सुरक्षित बनाएं। जब कोई समलैंगिक अपने बारे में बताये, तो उसके साथ व्यक्तिगत संपर्क करें और एक साधारण व्यक्ति के रूप में उसे देखें।

अध्ययन से पता चलता है के समलैंगिक लोगों के खिलाफ और अन्य पूर्वाग्रह में तब गिरावट आती है जब  बहुमत वाले लोग अल्पसंख्यक समूह के सदस्यों के साथ बातचीत करते हैं। विषमलैंगिकों की स्वीकृति के लिए ज़रूरी है की वो कम से कम एक प्रकट यानी अपने बारे में बताने वाले समलैंगिक को जाने। गे-विरोधी भावना बहुत कम हो जाती है जब कोई समलैंगिक स्वयं किसी विषमलैंगिक के सामने अपने बारे में बताता है।

अनुवाद: सचिन जैन

© 2012 American Psychological Association
American Psychological Association। (2008)। Answers to your questions: For a better understanding of sexual orientation and homosexuality। Washington, DC: Author। [Retrieved from http://www.apa.org/topics/sorientation.pdf.%5D

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